“छत्रपति शिवाजी महाराज, भारत नौसेना के जनक”

अभी कुछ दिन पहले ही नौसेना दिवस था , भारत मे छत्रपति शिवाजी महाराज को नौसेना का जनक कहा जाता है क्योंकि मध्ययुगीन भारत में छत्रपति शिवाजी पहले राजा थे, जिन्होंने नौसेना का महत्व देखकर उसका निर्माण किया।

इस विषय में उनकी दृष्टि इतनी पैनी थी कि उन्होंने आदेश दिए थे कि विदेशी साहूकार-व्यापारी उदाहरणार्थ फिरंगी, फरांशिस, वलंदेज, डिंगमार (आधुनिक अँगरेज, फ्रांसीसी, हॉलैंडवासी, डेनमार्कवासी) इत्यादि को समुद्र तट पर स्थान न दिया जाए। देना ही हो, तो तट से दूर, भूमि पर स्थान देकर, इन्हें कड़ी निगरानी में रखा जाए, क्योंकि तट पर रहकर ये अन्य से मिल राज्य के लिए खतरा बन सकते हैं व फिर इन्हें तट से हटाना मुश्किल होता है।

शिवाजी राजे ने नौसेना निर्माण व उसके नित्य कार्य में यह ध्यान रखा था कि राज्यकार्य संपन्न होते समय प्रजा को रंचमात्र दुःख न हो। यह प्रशासकीय नीति उनकी दूरदर्शिता व लोककल्याण मनोवृत्ति का प्रतीक है।

शिवाजी राजे की नौसैनिक दूरदर्शिता अत्यंत श्रेष्ठ स्तर की थी। उन्होंने महाराष्ट्र तट पर विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग, स्वर्णदुर्ग व पद्मदुर्ग जैसे महत्वपूर्ण जलदुर्गों का निर्माण करके अपने नौसैनिक प्रतिस्पर्धी विदेशियों जैसे जंजीरा के सिद्दी, पुर्तगाली व विशेषतः अँग्रेजों को नियंत्रण में रखा जो (अँगरेज), सिद्दीयों को खुले व छुपे रूप से शिवाजी महराज के विरुद्ध सहायता देते थे।

अंततः शिवाजी महराज ने अंग्रेजों का राजापुर (महाराष्ट्र) स्थित केंद्र नष्ट कर दिया (1661)। शिवाजी महाराज की नौसैनिक परंपरा में ही मराठों ने आगे सशक्त नौसेना का निर्माण किया जिसके पराक्रमी नौसेनाध्यक्ष/ सेनापति (दर्यासारंग) कान्होजी आंग्रे थे, जिनकी समुद्र पर इतनी धाक थी कि अंग्रेज समुद्र पर मराठों से दूर ही रहते थे। वीर कान्हो जी आंग्रे को सम्मानित करने हेतु भारतीय नौसेना का एक पोत, ‘कान्होजी आंग्रे’ भी है। यह स्थिति शिवाजी राजे के बाद भी थी, जिसका श्रेय छत्रपति शिवाजी महराज को है..।

Published by Jatin Tyagi

Former Indian Footballer, Coach, Enterprenure, Director Pankration Fitness Academy Private Limited, President at PFA ORGANISATION, Fit India Ambassador, Activist, Motivator.

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