लड़कियों को भद्दी गालियाँ देने वाला और सरे आम पीटने वाला कैसे बना द्रोणाचार्य?

Guru Dronacharya award winner Baldev Singh
द्रोणाचार्य अवार्डी श्री बलदेव सिंह जी

अच्छा कोच या गुरु कैसा हो? ऐसा जोकि अपने विद्यार्थियों को प्यार दुलार से समझाए या ऐसा जोकि ज़रूरत पड़ने पर विद्यार्थियों और खिलाड़ियों पर लात घूँसे बरसाए, गालियाँ दे! आज की शिक्षा पद्वति के हिसाब से शिक्षक यदि किसी छात्र-छात्रा पर ज़रा हाथ उठा दे तो उसकी नौकरी ख़तरे में पड़ जाती है। इसी प्रकार यदि कोच अपने किसी खिलाड़ी को डाँट दे तो उसकी खैर नहीं। लेकिन भारतीय महिला हॉकी में एक ऐसा कोच हुआ है, जिसने पुरुष खिलाड़ियों के साथ साथ महिला खिलाड़ियों को भी जमकर पीटा, गालियाँ दीं और ज़रूरत पड़ने पर सरे राह उन पर हाकियाँ भी बरसाईं।

यह बदमिज़ाज और बदतमीज़ कोच बलदेव सिंह है, जिसने भारतीय महिला हॉकी को 80 के लगभग अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से सुसज्जित किया, जिनमें से सात ने भारत की कप्तानी की। वर्तमान कप्तान रानी रामपाल, नवजोत, नवनीत, मोनिका, रीथ, मनप्रीत आदि लड़कियाँ भी उसकी शिष्या हैं। ऐसे सिरफिरे कोच को जब 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान मिला तो जलने वाले खूब जले। लेकिन ज़्यादातर ने कहा,”कोच हो तो बलदेव जैसा”।

हॉकी प्रेमी जानते हैं कि हॉकी जगत में नेहरू हॉकी टूर्नामेंट सोसाइटी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। 1964 में पहले सीनियर नेहरू टूर्नामेंट की शुरुआत हुई थी लेकिन तीस साल बाद जब बालिकाओं के अंडर 17 टूर्नामेंट का बिगुल बजा तो इसे भारतीय महिला हॉकी में एक नई क्रांति की शुरुआत माना गया। जिस हरियाणा की लड़कियों को आज कुश्ती और मुक्केबाज़ी में अव्वल माना जाता है, उसकी लड़कियों ने मान सम्मान कमाने की दिशा में बड़ा कदम हॉकी खेल कर बहुत पहले उठा लिया था।

जहाँ तक हरियाणा में हॉकी क्रांति की बात है तो शुरुआत शाहबाद मार्कंडा के श्री गुरु नानक प्रीतम गर्ल्स स्कूल से हुई। साई कोच बलदेव सिंह ने गन्ना मजदूरों, रेहड़ी पटरी लगाने वालों, रिक्शा और ऑटो रिक्शा चलाने वालों की बेटियों को हॉकी सीखाने का जिम्मा उठाया। दो साल बाद जब 1994 में शाहबाद स्कूल की लड़कियाँ शिवाजी स्टेडियम में नेहरू बालिका टूर्नामेंट में खेलने उतरीं तो किसी ने सोचा नहीं था कि सिर पर चुनरी ओढ़ने वाली लड़कियाँ राँची, राउरकेला, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, लखनउ की टीमों को हराते हुए फाइनल में जा चढ़ेंगी।

अंततः ख़िताबी मुक़ाबले में राँची के स्कूल से हार कर उपविजेता बनीं। कोच बलदेव ने मीडिया के सामने अपनी टीम की लड़कियों को भद्दी गलियाँ दीं, जिन्हें सुनकर हॉकी प्रेमी हैरान थे। इतने से भी दिल नहीं भरा तो कोच ने तालकटोरा स्टेडियम से सटे पुलिस अधिकारी किरण बेदी के निवास के समीप अपनी कुछ लड़कियों की हॉकी स्टिक से पिटाई कर डाली। तमाशा देख रहे आम लोगों ने बलदेव को बुरा भला कहा। उन पर केस करने की भी बात चली।

बलदेव का यह रूप देख कर मीडिया भी हैरान था। नेहरू सोसाइटी के सचिव शिव कुमार वर्मा और डाक्टर केजी कक्कर से सवाल जवाब हुए लेकिन कोच ने माफी नहीं माँगी।
बलदेव के तेवर देख कर क्लीन बोल्ड का कौतूहल जाग गया, शाहबाद स्कूल स्थित साई अकादमी का दौरा तय हुआ। वहाँ जाकर देखा कि शाहबाद की लड़कियाँ लड़कों की टीम से मुकाबला कर रही थीं।

चूँकि मुकाबला बराबरी पर ख़त्म हुआ, इसलिए बलदेव अपनी लड़कियों को उनके माँ-बाप की मौजूदगी में हॉकी से पीट रहे थे। खूब गलियाँ भी दे रहे थे। लेकिन किसी को भी कोच के रवैये से एतराज नहीं था। कुछ ग़रीब अभिभावकों के अनुसार कोच साहब उनके परिवारों के लिए भगवान का अवतार बन कर आए थे। साई से सेवानिवृत होने के बाद वह फतेहगढ़ साहिब में खिलाड़ियों की फ़ौजें तैयार कर रहे हैं। शाहबाद के बाद अब उन्होने फ़तहगढ़ साहिब और अमृतसर को महिला हॉकी का गढ़ बना लिया है।

1997 में शाहबाद ने पहली बार नेहरू बालिका खिताब जीत कर अपने विजय यात्रा की शुरुआत की। 16 बार विजेता, चार बार उपविजेता, तीन बार ख़िताबी तिकड़ी बनाई। बलदेव को बार बार श्रेष्ठ कोच आँका गया। इसके साथ ही हरियाणा ने राष्ट्रीय हॉकी में भी मजबूत कदम रखा। सालों साल हरियाणा और रेलवे के बीच राष्ट्रीय हॉकी के फाइनल खेले गए। रेलवे का पलड़ा इसलिए भारी पड़ता क्योंकि बलदेव की शाहबाद अकादमी की तमाम खिलाड़ियों को रेलवे ने अपने बेड़े में शामिल कर लिया था। इतना सब होने के बावजूद भी उसने गाली देने और खिलाड़ियों को सरे आम पीटने का सिलसिला जारी रखा।

यह बलदेव की गालियों का ही चमत्कार है कि उनके द्वारा तैयार खिलाड़ी भारतीय रेलवे और अन्य विभागों में उच्च पदों पर हैं, हज़ारों लाखों कमा रही हैं, देश के बड़े से बड़े खेल सम्मान पा रही हैं और उनके माता पिता कहते हैं कि जो कुछ पाया, सर की गालियों से मिला है।जब वह गाली नहीं देते, बेटियों को हॉकी से नहीं पीटते, बहुत बुरा लगता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम से नाराज़ हों।

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Published by Jatin Tyagi

Former Indian Footballer, Coach, Enterprenure, Director Pankration Fitness Academy Private Limited, President at PFA ORGANISATION, Fit India Ambassador, Activist, Motivator.

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