“ हमारी अपनी प्यारी राजकुमारी देवी चाची बिहार का सम्मान है मेरी चाची ” – प्रेरणादायक व्यक्तित्व

Shrimati Rajkumari Devi

यह साईकिल से आ रही कोई साधारण महिला नहीं है बल्कि पद्मश्री जैसे बड़े सम्मान से सम्मानित बिहार की श्रीमती राजकुमारी देवी हैं।
घर की दहलीज के पार खेत में कदम रख सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की राजकुमारी देवी पहले “साइकिल चाची” और फिर “किसान चाची” बनीं। पहले उन्हें किसानश्री और अब पद्मश्री से नवाजा गया है। राजकुमारी देवी समाज के लिए आदर्श बन गई हैं। घर से बाहर कदम रखने पर जिसने ठुकराया था, वही समाज व परिवार आज उनके कारण अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर सरैया प्रखंड का आनंदपुर गांव है। यहाँ के एक घर का कोना-कोना कृषि उत्पादों से अटा पड़ा है। आम, अदरख, ओल के अचार तो आंवला व बेल के मुरब्बे की खुशबू आपको बरबस यहाँ खींच लेगी। छोटी सी किसानी से भी परिवार कैसे खुशहाल हो सकता है, यह घर इसकी मिसाल है।
इसके पीछे है राजकुमारी देवी की कड़ी मेहनत और उनका त्याग। शादी के नौ वर्ष तक संतान नहीं होना और पति की बेरोजगारी के कारण घर की दहलीज से बाहर कदम रखने के कारण इस बहू को समाज व परिवार से बहिष्कृत कर दिया गया था।
मगर, उस बहू की दृढ़ इच्छाशक्ति ने उसी समाज द्वारा आज “किसान चाची” का न सिर्फ नाम दिया, बल्कि सम्मान भी।

खेत में रखा कदम;

राजकुमारी कहती हैं, करीब 15 वर्ष की उम्र में शादी हो गई। शिक्षक पिता ने प्यार से पाला था, मगर ससुराल में स्थिति उलट थी। जब तक कुछ समझते परिवार ने अलग कर दिया। सिर्फ जमीन से परिवार चलाना संभव नहीं था।
शादी के कई वर्ष तक संतान नहीं होने के कारण पहले से तिरस्कार झेल रही थी। उस पर से खेती शुरू की। परिवार के साथ अब समाज ने बहिष्कृत कर दिया। मगर, राजकुमारी के कदम नहीं रुके। उन्होंने खेती के साथ छोटे-मोटे कृषि उत्पाद बनाने शुरू किए। साइकिल उठाई और मेला-ठेला व घर-घर जाकर इसकी बिक्री शुरू की। भूखे रहने पर नहीं पूछने वाला समाज दो रोटी कमाने के इस तरीके पर और सख्त हो गया। यहाँ तक कि अबकी बार तो पति भी नाराज हो गए। पति अवधेश कुमार चौधरी कहते हैं, साइकिल से सामान बेचना उन्हें अच्छा नहीं लगा।

बढ़ता गया कारवां;

रूढ़िवादी समाज जैसे-जैसे सख्त हो रहा था राजकुमारी का संकल्प उतना ही मजबूत हो रहा था। कुछ बेहतर करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया। पूसा कृषि विश्वविद्यालय से जुड़कर आधुनिक तरीके से खेती के गुर सीखे। अचार व मुरब्बे के काम को बढ़ाया। आसपास की महिलाएं व युवतियों को प्रशिक्षण दिलाकर इस काम में लगाया। स्थिति बदलने लगी। दो बेटी व एक बेटा के रूप में तीन संतानें भी हुई।

महज डेढ़ सौ रुपये से शुरू किया गया कारोबार बढ़ता गया। इसके साथ ही नाम भी। बिहार सरकार ने वर्ष 2007 में “किसानश्री” से सम्मानित किया। यह सम्मान पानी वालीं एकमात्र महिला थीं। इस सम्मान के बाद ही ‘साइकिल चाची’ का नाम “किसान चाची” हो गया।

प्रशंसकों में नरेंद्र मोदी जी, नीतीश व बिग बी भी;

अचार व मुरब्बे की खुशबू की तरह किसान चाची का नाम भी फैलने लगा। अहमदाबाद में उनकी इस लगन की तारीफ नरेंद्र मोदी जी ने भी की। तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी खुद इनकी खेती व छोटे से कारोबार को देखने इनके घर आए। एक चैनल पर आयोजित कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के साथ किसान चाची के कार्यक्रम का प्रसारण हो चुका है। कार्यक्रम के दौरान बिग बी उनसे खासे प्रभावित हुए थे। कार्यक्रम के बाद पांच लाख रुपये, आटा चक्की व साडिय़ां किसान चाची को भेजे गए। इस राशि से उन्हें कारोबार में काफी मदद मिली।

महिलाओं को नहीं देखें हीन भावना से;

महिलाओं के प्रति समाज के दोहरे मापदंड आज भी “किसान चाची” को बहुत खलते है। वह कहती हैं कि हम किसी से कम नहीं है, बस हमें साथ लेकर चलिए और फिर देखिए….!

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Published by Jatin Tyagi

Former Indian Footballer, Coach, Enterprenure, Director Pankration Fitness Academy Private Limited, President at PFA ORGANISATION, Fit India Ambassador, Activist, Motivator.

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