“क्या है आत्मनिर्भर अभियान?”


इसकी शुरुआत में कुछ ऐसे करूंगा कि जब मिखाइल गोर्बोच्योव ने अपनी बायोग्राफी में लिखा है।
यूरोप में अध्ययन के दौरान उन के साथ कुछ जापानी भी पढते थे।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान का पतन हो चुका था। आर्थिक प्रतिबंध थे।
जब क्लास चल रही होती थी तो ये दो जापानी छात्र बारी बारी से लिखते थे क्योंकि एक लिखता था तो दूसरा पेंसिल छील कर तैयार करता था क्योंकि जापानी पेंसिल उस समय तक अच्छी गुणवत्ता की नही थी इसलिये पेंसिल बार बार टूट जाती थी।
दूसरे छात्रों ने कहा तुम अच्छी पेंसिल (इंग्लैंड वाली /अमेरिका) क्यों नही काम लेते इतनी महंगी भी नही।
जापानी छात्र बोले, आंखों में आंसू थे। जब हमारी चीज को हम ही नही खरीदेंगे तो दूसरा क्यों खरीदेगा। भले ही आज हम अच्छे नही फिर भी एक दिन ऐसी पेंसिल बनाएंगे की दुनिया उपयोग करेगी।
स्व पर गर्व करना ही पड़ेगा तभी दुनिया तुम पर गर्व करेंगी।
बिना उपयोग के कैसे अच्छे product बना लोगे।
उपयोग होता है वहीं research व Development की संभावनाए ज्यादा होती है ।

यह कोई कहानी नहीं है यह एक आपबीती है जो जापान के दार्शनिक ने अपनी बायोग्राफी में लिखिए जब एक बच्चा अपने देश हित के बारे में इतना सोच सकता है। तो यह सोचकर सुनकर पढ़कर कितना गर्व महसूस होता है कि ऐसे बच्चे भी देश में हैं जो अपने देश के हित के बारे में इतना कुछ सोचते हैं आज सबको पता है जापान अपने आप में विकासशील देश है कितना प्रगति पर है तो किसी को आत्मनिर्भर का सबसे सरल उदाहरण देखना हो तो जापान को देखिए उनका भी वही नारा था जो आज हमारा है कि स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ, देश में रहो, देश में खाओ, देश में घूमो और देश का पहनो।

“इस तरह पूर्ण हुआ जापान का आत्मनिर्भर अभियान!!”

अब बारी है हिंदुस्तान की जैसा कि हम सभी इस त्रासदी से गुजर रहे हैं कोविड-19 से बोलते हैं। मैं आह्वान करता हूं, पूरे हिंदुस्तान से की जो उस समय जापान ने किया। आज वह हमें करने की बहुत जरूरत है। (“लोकल बने वोकल बने”) अपने देश की बनी हुई चीजों को इस्तेमाल गर्व से करें और पूर्ण उत्साह से उसका प्रचार भी करें।

तो हिंदुस्तान क्या आप तैयार हैं कि घर उसे अपने देश में बनी हुई चीजों का इस्तेमाल करने में अपने देश में घूमने के लिए और इस तरह से प्रचार करेगी कि बाहर के लोग भी हमारे देश में आए हमारी बनी हुई चीजों को इस्तेमाल करें हमारे बने हुए घूमने वाले स्थानों पर घूमे हम अपने देश का बना हुआ खाना ही खाएं देश की चीजों को इस्तेमाल करें स्वदेशी अपनाएं विदेशी भगाएं गर्व से हिंदुस्तानी बनकर अपने नाम अपने देश का नाम बढ़ाएं गर्वित करें तो अगर आप तैयार हैं तो कमेंट करिए गा शेयर करिएगा मेरे पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों पर।

धन्यवाद

🙏”आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्पूर्ण“🙏🇮🇳

जय हिंद जय माँ भारती 🙏

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Published by Jatin Tyagi

Former Indian Footballer, Coach, Enterprenure, Director Pankration Fitness Academy Private Limited, President at PFA ORGANISATION, Fit India Ambassador, Activist, Motivator.

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