“क्रूरता की पराकाष्ठा”

आज दुनिया ने फिर एक बेजुबान को क्रूरता का शिकार होते देखा हैं।

मैं पूछना चाहता हूं सरकार से जो कानून आईपीसी सेक्शन 428 &429 , 1960 में बनाया गया था। उसका क्या पालन हो रहा है या सिर्फ नाम के लिए बनाया था।

हमारा बच्चा ज़िंदा था, उसकी पूँछ डर के मारे पूरी अंदर दबी हुई हुई, वो बेबस था, उसके सामने हैवानियत का नाच खेला जा रहा था, आस पास डंडे थे, पत्थर थे, हाथ पाव मुँह बंधा हुआ था और वो रो रहा था और हैवान मुस्कुरा रहे थे।

हमारा बच्चा “कुत्ता” था इसीलिए दुनिया को फ़र्क़ नही पड़ा पर दुनिया समझ ले की क्रूरता करने वाला ज़िंदा हैं और इसीलिए दुनिया को डर डर कर जीना चाहिये क्योंकि हमने तो अपने बच्चे की मौत का दुःख मना लिया पर वो क्रूरता जीवित हैं और आपका बच्चा इन क्रूर मानसिकता वाले लोगों के बीच बड़ा होने वाला हैं।

हम यदि हमारे बच्चे की मौत का मातम मना रहे हैं तो आप आने वाले क्रूर भारत की रचना के निर्माण पर अफ़सोस जता कर अपनी आवाज़ बुलंद कर लेना क्योंकि यह आवाज़ तेज़ नही हुई तो सोचिये क्या होने वाला हैं!

आप bank balance बनाने में व्यस्त हैं
आप नोट छापने मे व्यस्त हैं
आप बंगला बनाने में व्यस्त हैं
आप property ख़रीदने में व्यस्त हैं
आप गहने ख़रीदकर अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाह रहे हैं
आप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाह रहे हैं
लेकिन एक बात याद रखना की आपने यदि इस दुष्ट कृत्य के खिलाफ अपनी आवाज़ नही उठाई को निर्भया, प्रियंका, पाल घाट के संत और कठुआ के जैसे पता नही किसका बच्चा किसकी क्रूरता का शिकार होने वाला हैं।

आपको कुत्ते से प्यार नही हैं पर अपने बच्चे से तो प्यार हैं ना?
आप चाहते हैं ना की आपका बच्चा एक सुंदर और सुरक्षित देश में बड़ा हो?
आप देश निर्माण में योगदान देना चाहते हैं ना?
आप भारत मे हो रही क्रूरता से थक गए हैं?
आप negative news नही पढ़ना चाहते हैं ना?

तो आवाज़ उठा दीजिये और सरकार से पूछिए की सिर्फ़ Animal welfare संस्थाएँ खोल देने से कुछ नही होगा क्योंकि यदि सिर्फ़ उतना कर देना पर्याप्त था तो फिर देश के कोने कोने में फैल रही क्रूरता रुक क्यों नही रही हैं?

सरकार को animal awareness program launch कर जनता को सीखाना ही पड़ेगा की स्ट्रीट dog के साथ कैसा व्यवहार करना हैं। और यह काम सिर्फ़ प्रशासन ही जनता को सिखा सकती हैं क्योंकि उद्दंड नागरिक को प्रशासन की ही बोली समझ में आ सकती हैं।

और यदि सरकार को इस विषय पर कोई जागरूकता नही करनी हैं तो देश की सभी Animal welfare संस्थाएँ भी बंद कर देनी चाहिए क्योंकि सरकार को आगे आकर यदि जागरुकता नही करनी हैं तो फिर किस बात का कल्याण करवाने के प्रयास कर रही हैं सरकार? आख़िर Animal welfare organisations कैसे देश के चप्पे चप्पे में इस विषय पर जागरुकता कर सकती हैं?

सरकार ने नागरिक को मास्क पहनना सीखाया तो नागरिकों ने मास्क पहना……
Infact उस video में वो तीनो बच्चों ने भी मास्क पहना हुआ हैं तो फिर उन्होंने इतना विभत्स हत्या कांड इसीलिए कर दिया क्योंकि सरकार ने school के पाठ्यक्रम मे दया करुणा प्रेम वात्सल्य ममता तमीज़ और नियम क़ायदे सीखाये ही नही!!

अकबर और औरंगज़ेब सीखाने से कुछ नही होगा हुज़ूर। यथार्थ के मुद्दों को आने वाली generation को सीखा दीजिए नही तो अनर्थ हो जाएगा।

WeWantAwareness

और वह भी देश के चप्पे चप्पे में, भौंगा लगा कर!

जय हिंद
में अपील करता हैं की आपको जिसको tag करना हैं Share करना है कीजिये और अपनी आवाज़ को बुलंद कीजिए।

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