“क्यों जरूरी है महिलाओं का सशक्त होना!”

सामाजिक जगह पर भीड़ में काम करने वाली महिलाओं की सबसे बड़ी चुनोती उक्त काम को करना नहीं है जिसके लिए वो गईं हैं , बल्कि की अपने ऊपर किसी चारित्रिक सवाल से बचना है ।
मुझे बेचैनी सवालों से तो है ही , अधिक बेचैनी इस बात की है कि , उन सवालों पर दूसरी महिलाएं ख़ामोश रहती हैं ।
इसमें जितना वर्तमान में पुरुष दोषी है उतनी ही महिलाएं दोषी है । महिलाएं इसलिये दोषी हैं कि वो , व्यक्ति देखकर आवाज़ उठाती हैं कि वो किस खेमे का है ? क्या फर्क पढ़ता है कि सवाल स्मृति ईरानी जी पर उठे , अपने राजनीतिक पुत्रों को चुप कराने की ज़िम्मेदारी सोनिया जी की है , वहीं क्या फर्क पढ़ता है सवाल सोनिया जी पर उठे , अपने राजनीतिक भाइयों को चुप कराने की ज़िम्मेदारी स्मृति जी की है । जिस दिन ये हो गया , मजाल है कोई महिलाओं पर टिप्पणी कर भी जाये । महिलाओं पर सबसे आसान हमला होता है उसके चरित्र पर हमला , ये हमला ऐसा शिखंडी है जो , किसी भी भीष्म महिला को धराशाई कर देता है , जिससे वो बिखर जाती है , वो बिखर भी इसलिए जाती है क्योंकि भारतीय जीवन में नर-मादा दोनों को ही यही सिखाया जाता कि उसकी महिला के लिए उसकी सबसे बड़ी सम्पत्ति उसका शरीर है , वरना अख़बार की हैडिंग में किसी महिला के बलात्कार पर हैडिंग ‘इज्जत हुई तार-तार’ , ‘अस्मत लूटी गई’ नहीं आती ।
पुरुषों की इज्जत उनके कर्मों से है , वहीं महिलाओं की इज्जत उनके कुछ अंग मात्र हैं । जहाँ मामला प्रत्यक्ष विरोध का हो जाता है , वहाँ महिलाओं की डगर बड़ी कठिन है । भारतीय पुरुष एवं भारतीय गैर राजनीतिक महिलाएं अपनी इक्षा अनुसार कपड़े पहनती हैं , पहन रही हैं , अब तक ये सौभाग्य भारतीय राजनीतिक महिलाओं को नहीं मिला है , कारण वही है , चरित्र पर सवाल ये हमारी वैचारिक बीमारी का भी नतीजा है । उससे भी खतरनाक दो बातें हैं पहली ये है कि सवाल उठाने वाले जबाब जानना ही नहीं चाहते , और दूसरी बात ये कि सवाल सुनने वाले सवाल से ही निर्णय कर लेते हैं ।
तब वो बिना जबाबदेही के ही , बिना जबाब दिए ही अपराधी हो जाती है ।
इसको हम तब तक नहीं समझ पायँगे जब तक हमारी नज़दीकी कोई महिला इसकी पीढ़िता ना हो जाये , इसलिए
जो-जो महिलाएं ये लेख पढ़ रही हैं , इतना कहूँगा , तैयार रहिये ख़ुद पर उठने वाले शिखंडी सवालों के लिए और उससे भी महत्वपुर्ण सवाल किसी के भी चत्रित पर उठे , बिना दल के बिना खेमे को ध्यान में रख सवाल उठाने वालों को चुप कराइये ।

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