एक्यूप्रेशर क्या है ?

पांरपरिक चीनी उपचार में पिछले 2000 वर्षों से एक्यूप्रेशर थेरेपी का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है और आज भी इसका उपयोग सारी दुनिया में किया जा रहा है। यह तथ्य बीमारी और दर्द के उपचार में एक्यूप्रेशर थेरेपी के लाभ का प्रमाण है।

एक्यूप्रेशर शरीर की स्वयं को ठीक करने और व्यवस्थित करने की क्षमता को जगाने के लिए संकेत भेजने की एक तकनीक है। जिस तरह योग में प्राण (जीवन शक्ति) को बहुत महत्त्व दिया जाता है, उसी तरह पारंपरिक चीनी उपचार में “की या क्यूई” (Qi) (जीवन ऊर्जा) का महत्व है। ऐसा माना जाता है कि हमारे शरीर के अंदर इस जीवन ऊर्जा का प्रवाह कुछ नलिकाओं के माध्यम से होता है, जिन्हें “मेरीडियन” कहते हैं।

इस प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट या “यिन” (yin) और “यांग” (yang) का असंतुलन बीमारी  और दर्द का कारण हो सकता है। एक्यूप्रेशर इस असंतुलन को सही करके जीवन ऊर्जा के प्रवाह में सुधार लाता है, इससे शरीर अपनी प्राकृतिक स्वस्थ अवस्था में आ जाता है।

एक्यूप्रेशर बिन्दु या एक्यूप्रेशर पॉइंट ?

एक्यूप्रेशर पॉइंट, शरीर पर एक ऐसा बिंदु होता है जिस पर दबाव डाला जाता है, ऐसे बिंदु को प्रेशर पॉइंट भी कहा जाता है।

वैसे तो मानव शरीर में 1000 से ज्यादा एक्यूप्रेशर पॉइंट होते हैं लेकिन इन पॉइंट को समझने के लिए हम अलग प्रक्रिया करते हैं। सभी एक्यूप्रेशर पॉइंट को हम 14 अलग-अलग भागों में बांटते हैं और इन 14 भागो को हम मेरीडियन कहते हैं।

यह 14 मेरिडियन इस प्रकार है:-

Lungs, Large Intestine, Stomach, Spleen, Heart, Small Intestine, Urinary Bladder, Kidney, Pericardium, Triple Warmer, Gall Bladder, Liver, Conceptional, Governing Vessel.

एक्यूप्रेशर हम शरीर के अलावा हाथ पर पैरों पर चेहरे पर कर सकते हैं और एक्यूप्रेशर से हम नाभि का उपचार भी कर सकते हैं।

एक्यूप्रेशर कैसे करे ?

एक्यूप्रेशर थेरेपी निम्न चरणों में पूरी की जाती है – 

  • एक्यूप्रेशर बिंदु पर हल्का दबाते हुए मालिश करें।
  • जब एक्यूप्रेशर बिंदु पर मालिश करें, तब आराम से किसी सुविधाजनक जगह पर बैठ जायें और अपनी आँखें बंद करके गहरी साँस लें।
  • मालिश को जब आप को पंसद हो तब बार-बार करते रहे। एक दिन में कितनी बार करें इसका कोई नियम नहीं हैं, जितनी बार आपको सुविधाजनक लगे उतनी बार कर सकते हैं।
  • आप स्वयं इन एक्यूप्रेशर बिंदुओं की मालिश कर सकते हैं। या किसी अन्य की भी मदद ले सकते हैं। हालाँकि, एक्यूप्रेशर के किसी अच्छे जानकर से मालिश करवाना अधिक सुरक्षित होता है।

एक्यूप्रेशर कैसे काम करता है –

एक्यूप्रेशर थेरेपी शरीर के निश्चित बिंदुओं पर दबाव डालकर “की” (Qi) नामक जीवन ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती है। इस तरह दबाव डालने के लिए काफी बारीकी से काम करना पड़ता है क्योंकि हमारे शरीर के अंदर मुख्य चैनल्स (मेरीडियन) पर 193 बिंदु हैं और इसके अलावा 670 अन्य बिंदु हैं। रक्त वाहिकाओं के तंत्र की तरह इन चैनल्स के भी अपने कनेक्शन के नेटवर्क होते हैं।

इन चैनल्स में “की” ऊर्जा को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इसमें शामिल हैं – मजबूत करना, फैलाना या शांत करना। कमजोर “की” ऊर्जा को मजबूत किया जाता है, रुकी हुई “की” ऊर्जा को फैलाया जाता है और अधिक सक्रिय “की” ऊर्जा को शांत किया जाता है।

एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर सामान्य रूप से कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक दबाव दिया जाता है। एक्यूप्रेशर बिंदुओं की मालिश या इन बिंदुओं को किसी चीज़ से दबाकर या दोनों तरीकों को एक साथ उपयोग करके इनपर दबाव डाला जाता है।

हालाँकि, जिन एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर दबाव डाला जाता हैं वो सवेंदनशील हो सकते है लेकिन एक्यूप्रेशर से दर्द नहीं होना चाहिए। बीमारी की स्थिति के हिसाब से उपचार हर दिन या फिर दिन में कई बार दिया जा सकता है।

एक्यूप्रेशर के लाभ –

एक्यूप्रेशर से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारें में अधिक शोध नहीं हुआ है। हालाँकि, निम्न लिखित परेशानियों में एक्यूप्रेशर से लाभ मिल सकता हैं – 

  • मतली – कुछ शोधों के अनुसार कलाई के एक्यूप्रेशर से मतली और उलटी का उपचार किया जा सकता हैं।
  • कैंसर – एक्यूप्रेशर थेरेपी  कीमोथेरेपी  से  कैंसर  के उपचार के तुरंत बाद होने वाली मतली से बचाती है और यह तनाव, ऊर्जा स्तर को बढ़ाने, दर्द कम करने और कैंसर या इसके उपचार के लक्षण कम करने में भी मदद कर सकती है।
  • दर्द – कुछ प्राथमिक प्रमाण यह बताते है कि एक्यूप्रेशर थेरेपी कमर दर्द, आपरेशन के बाद होने वाले दर्द और सिरदर्द में मदद कर सकती है। इससे अन्य तरह के दर्द में भी लाभ हो सकता है।
  • गठिया – कुछ अध्ययनों के अनुसार एक्यूप्रेशर थेरेपी से हमारे शरीर में एंडोर्फिन्स रिलीज़ होते हैं और यह थेरेपी एंटी-सूजन असर को बढ़ावा देती है, जिससे कुछ प्रकार के गठिया रोगों में मदद मिलती हैं।
  • अवसाद और चिंता – कुछ अध्ययन बताते है कि एक्यूप्रेशर थेरेपी से थकान और मनोदशा में सुधार हो सकता है।

एक्यूप्रेशर के नुकसान –

किसी भी अन्य उपचार की ही तरह एक्यूप्रेशर थेरेपी के भी कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे कि – 

  • गलत बिंदुओं पर दबाव डालने से परेशानी में कोई लाभ नहीं होता है और कभी-कभी इससे कोई दूसरी परेशानी भी हो सकती है।
  • बहुत अधिक या बहुत कम दबाव से कोई मदद नहीं मिलती है। वास्तव में बहुत अधिक दबाव से शरीर के उस अंग में फ्रैक्चर  हो सकता है।
  • गर्भावस्था  में एक्यूप्रेशर थेरेपी करवाने से  मिसकैरेज हो सकता है और अगर गलत बिंदु पर दबाव डाला जाता है तो माँ और बच्चे दोनों को खतरा हो सकता है\।
  • कुछ बीमारियों को थोड़े समय के लिए ठीक किया जा सकता है किन्तु वें दुबारा हो सकती हैं।
  • अगर बीमारी बहुत पुरानी है तो एक्यूप्रेशर थेरेपी से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है और बीमारी और भी गंभीर हो सकती है।
  • सामान्य रूप से एक्यूप्रेशर बहुत सुरक्षित उपचार है। अगर आपको कैंसर,  दिल की बीमारी, जीर्ण रोग (पुरानी बीमारी) हैं, तो कोई भी थेरेपी करवाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। एक रजिस्टर्ड एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट से ही थेरेपी करवाएं।

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